national-research-canter-on-camel

PRESS RELEASE

 

 एनआरसीसी द्वारा विशेष स्वच्छता अभियान तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन

बीकानेर 31.10.2022 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा भारत सरकार के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत दिनांक 02 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022 की अवधि में विशेष स्वच्छता (लंबित मामलों के निस्तारण के लिए) अभियान के तहत स्वच्छता संबंधी संदेश को व्यापक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देष्य से केन्द्र द्वारा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। 
प्रेस वार्ता के दौरान केन्द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने संवाददाताओं/पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि केन्द्र द्वारा इस विशेष स्वच्छता अभियान के तहत निर्धारित गतिविधियाँ पूरे मनोयोग से संचालित की गई। डॉ.साहू ने स्वच्छता के महत्व एवं इसके प्रति जागरूकता पर बात करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के अलावा माननीय प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता के प्रति जागरूकता का यह अभियान अब धीरे-धीरे हम भारतीयों की आदत में शामिल हो रहा है, स्वच्छता को लेकर आमजीवन की मानसिकता में परिवर्तन आने से हमारे सार्वजनिक स्थल, विद्यालय, अस्पताल तथा पर्यटन स्थलों आदि की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र की अनुसंधान के अलावा पर्यटन स्थल के रूप में भी एक विशिष्ट वैश्विक छवि है, इसे बनाए रखने में स्वच्छता संबंधी अभियान महत्ती रूप से सहायक सिद्ध हो रहे हैं, इस दर्शनीय स्थल को देखने आमजन दिन-ब-दिन अधिकाधिक आकर्षित हो रहे हैं तथा केन्द्र को पर्यटनीय सुविधाओं के माध्यम से एक अच्छी खासी आय भी प्राप्त हो रही है जिन्हें देख ऊँट पालकों को भी इसे उद्यमिता से जुड़ते हुए लाभ कमाना चाहिए। डॉ.साहू ने वार्ता में ऊँटनी के दूध के महत्व एवं केन्द्र द्वारा विकसित विभिन्न स्वादिष्ट दुग्ध उत्पादों का स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभ संबंधी जानकारी भी दीं।
केन्द्र के नोडल अधिकारी (स्वच्छता) श्री अखिल ठुकराल, प्रशासनिक अधिकारी ने केन्द्र में एक माह तक चली स्वच्छता  गतिविधियों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि अभियान में कार्यालयीन गतिविधियों के अलावा अन्य कार्यक्रमों यथा-पशु स्वास्थ्य शिविर, बालक-बालिकाओं हेतु प्रतियोगिता, सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई एवं पर्यटन विकास को बढ़ावा देने स्वच्छता संबंधी गतिविधियों संचालित की गई।
इस अवसर पर स्वच्छता गतिविधियों, केन्द्र के अनुसंधान खासकर ऊँटनी के दूध एवं पर्यटन विकास के कई मुद्दों पर भी बातचीत की गई। वार्ता के दौरान ऊँटनी के दूध के नूतन उत्पादों का रसास्वादन भी करवाया गया। अंत में धन्यवाद प्रस्ताव डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा दिया गया। 

 

बीकानेर 17.09.2022  ।  भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्ट्र अनुसन्‍धान केन्द्र में ‘ओजोन लेयर, इट्स डिप्लीशन एण्ड इम्पेक्ट ऑन लिविंग बींगस् - OZONE LAYER, ITS DEPLETION AND IMPACT ON LIVING BEINGS’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आज समापन हुआ । नेशनल एनवॉयरमेंटल साइंस अकादमी (नेसा), नई दिल्ली द्वारा एनआरसीसी सहित अन्य विभिन्न संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रान्‍तों दृ जम्‍मू कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, नई दिल्‍ली, उत्‍तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि राज्यों के प्रतिभागियों ने इस आयोजन के माध्यम से अपने अनुसंधान को प्रस्तुत किया ।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो.जीत सिंह सन्धु, कुलपति, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर ने कहा कि ओजोन परत के क्षरण एवं इसके प्रभावों पर गहन वैज्ञानिक चिंतन आज के समय की मांग है । क्योंकि अभी भी इस संबंध में पर्याप्त अनुसंधान साहित्य की कमी है । उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न पहलुओं पर मंथन तथा प्राप्त होने वाले निष्कर्षों एवं सुझावों के आधार पर ओजोन परत के क्षरण को रोकने एवं आमजन में इसके प्रति जागरूकता लाने की दिशा में यह निश्चित रूप से मददगार साबित हो सकेगा ।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आर्तबन्धु साहू, निदेशक, एनआरसीसी,बीकानेर  ने कहा कि अल्ट्रावाईलेंट किरणें जीव जगत के लिए अत्यधिक हानिकारक है । अत: इन्हें रोकने के लिए ओजोन परत क्षरण को प्राथमिकता पर रोका जाना चाहिए। इसके लिए हमें व्यापक सोच के साथ एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में पर्यावरणीय दायित्व निर्वहन करना होगा ।  डॉ.साहू ने कहा कि ऊँट, ग्रीन हाऊस गैसों का उत्सर्जन अन्य रूमीनेंटस् से कम करता है, यह बात सिद्ध भी हो चुकी है । इसलिए ऊँट को एक एनवॉयरमेंट फ्रेंडली पशु मानते हुए इसका पालन समग्र मानवता के हित में किया जाना चाहिए ।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ.एन.डी.यादव, अध्‍यक्ष, काजरी, बीकानेर ने कहा कि ओजोन परत के क्षरण को रोकने के लिए एक कानूनी नीति तैयार की जानी चाहिए जिसमें वातावरण को प्रदूषित करने पर जिम्‍मेदारी तय की जाए । इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ.ए.के.वर्मा, सचिव, एशियन बायोलोजिकल रिसर्च फाउंडेशन (एबीआरएफ) ने कहा कि ओजोन परत के क्षरण से वैश्विक स्तर पर जो चिंता की लकीरें उभरी थीं, विगत वर्षों में सबके सकारात्मक प्रयासों से उसकी मोटाई में वृद्धि हुई है जो कि इस दिशा में और अधिक प्रयास हेतु प्रेरित कर रही है ।
     समापन कार्यक्रम से पूर्व आमंत्रित विषय विशेषज्ञों द्वारा पशुधन सत्र के दौरान अपने लीड पेपर प्रस्तुत किए । तत्पश्चात राउंड टेबल डिस्कशन में ओजोन परत के प्रबंधन एवं पुनःस्थापन ( रेमेडिएशन) पर गहन विचार किया गया तथा इस आधार पर एक अनुशंसा नोट तैयार किया गया । समापन कार्यक्रम में बेस्ट ऑरल प्रजेंटेशन एवं बेस्ट पोस्टर प्रजेंटेशन के विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया । आयोजन सचिव डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक, एनआरसीसी ने आयोजन संबंधी विस्तृत में जानकारी देते हुए आयोजन में पधारे सभी गणमान्य जनों, शोधकर्त्ताओं, प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया ।

 

एनआरसीसी व एसपी मेडिकल कॉलेज के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर

बीकानेर 14 सितम्बर, 2022 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) बीकानेर एवं सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के बीच आज एक महत्‍वपूर्ण एमओयू किया गया है।
इस द्विपक्षीय समझौते (एमओयू) पर भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू एवं सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मद सलीम ने हस्ताक्षर किए।
इस महत्वपूर्ण एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केन्द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि इस एमओयू के माध्यम से हम मिलकर कैमल मिल्क व इससे निर्मित दुग्ध उत्पादों की मानव के विभिन्न रोगों यथा-क्षय रोग, डेंगू, मधुमेह व अन्य रोगों में सहायक थैरेपी के रूप में शोध कार्य करेंगे। डॉ. साहू ने कहा कि ऊँटनी के दूध व उत्पादों का सदियों से परपंरागत औषधीय उपयोग होता रहा है। इन्हीं गुणों को वैज्ञानिक तरीके से मानव रोगों में क्लिनिकल शोध के द्वारा प्रमाणित करने हेतु अनेकों योजनाएं आने वाले समय में क्रियान्वित की जाएगी । उन्होंने कहा कि शोध के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने पर उष्ट्र विकास एवं संरक्षण को भरपूर बल मिलेगा। साथ ही इससे मरुस्‍थल के जहाज की ‘औषधीय भण्‍डार’ के रूप में उपादेयता को भी सिद्ध करने में महत्ती सहायता मिल सकेगी।

एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मद सलीम ने एनआरसीसी से इस एमओयू के माध्यम से जुड़ने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि एनआरसीसी एक उत्कृष्ट अनुसन्धान संस्थान है तथा ऊँटनी के दूध की औषधीय उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न मानव रोगों के उपचार हेतु शोध कार्य किया जाएगा। इस एमओयू के तहत आने वाले समय में अनेकों शोध कार्य समन्वयात्मक रूप से क्रियान्वित किए जा सकेंगे।
इस एमओयू पर अन्य हस्ताक्षरी के रूप में एसपी मेडिकल कॉलेज की ओर से डॉ. बालकिशन गुप्ता, वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (मेडिसिन), डॉ. सुरेन्द्र कुमार, अतिरिक्त प्रिंसिपल, डॉ..संजय कुमार कोचर, डॉ. अंजली गुप्ता एवं डॉ. परमिन्द्र सिरोही थे, वहीं एनआरसीसी की तरफ से डॉ. राकेश रंजन, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ. श्याम सुन्दर चौधरी, वैज्ञानिक मौजूद थे।

 

अनुसूचित जनजाति उपयोजना के किसानों का एन.आर.सी.सी. में भ्रमण कार्यक्रम

भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसन्‍धान केन्‍द्र में अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के अन्‍तर्गत बीकानेर स्थित केन्‍द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्‍धान संस्‍थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तहत गुड़ामनाली व बायतु, जिला बाड़मेर के 40 पशुपालकों/किसानों ने दिनांक 30 अगस्‍त, 2022 को भ्रमण किया । इस दौरान पशुपालकों/किसानों के पास एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया एवं उन्‍हें केन्‍द्र द्वारा फील्‍ड स्‍तर पर किए जा रहे कार्यों की व्‍यावहारिक जानकारी भी गई ।
किसानों से संवाद के दौरान केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने अनुसन्‍धान कार्यों एवं उपलब्धियों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह केन्‍द्र, परिवर्तित परिदृश्‍य में उष्‍ट्र पालन व्‍यवसाय के संरक्षण एवं विकास हेतु विविध रूपों में सतत प्रयत्‍नशील है तथा विशेषकर उष्‍ट्र दुग्‍ध व्‍यवसाय एवं उष्‍ट्र पर्यटन विकास को नूतन आयामों में बढ़ावा देने हेतु यह केन्‍द्र दृढ़संकल्पित है क्‍यांकि इनमें उद्यमिता विकास की प्रबल संभावनाएं विद्यमान है तथा प्रदेश का पशुपालक/किसान आय स्रोत के रूप में अपनाकर इनसे अच्‍छी खासी आमदनी प्राप्‍त कर सकता है । डॉ.साहू ने ऊँटनी के दूध उत्‍पादन, इसके संग्रहण, बाजार एवं विपणन आदि विभिन्न मुद्दों को किसानों के समक्ष रखा तथा  इस संबंध में खुलकर बातचीत हुई ।
केन्‍द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.आर.के.सावल ने इस दल को बताया कि पशुपालक/किसान मौसमी चारे को एक एकत्रित कर पशु आहार चारे की कमी को दूर कर सकते हैं, ऐसे कई प्रोटीनयुक्‍त चारे  यथा- नागफनी, नीम, सहजन, शहतूत आदि को खेतों की मेड़ पर लगाकर तथा कीकर, सिरस, विलायती बबूल की पत्तियों से पशु के आहार प्रबंधन को पौष्टिक व सस्‍ता बना सकते हैं । 
केन्‍द्र वैज्ञानिकों में  – श्रीमती प्रियंका गौतम एवं डॉ.शान्‍तनु रक्षित द्वारा इस दल को उष्‍ट्र डेयरी, उष्‍ट्र संग्रहालय, उष्‍ट्र बाड़ों, पशु चारा उत्‍पादन इकाई, कैमल मिल्‍क पार्लर, हर्बल गार्डन तथा उष्‍ट्र पर्यटनीय विकास की दिशा में केन्‍द्र द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों संबंधी व्‍यावहारिक जानकारी दी गई । वहीं वैज्ञानिकों द्वारा बाड़मेर क्षेत्र में उपलब्‍ध वनस्‍पति खासकर वर्तमान में अनार आदि के रस (जूस), बीज, तेल, पत्‍ते/अनार छिलके आदि प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता  बनाए रखने हेतु भी प्रोत्‍साहित किया गया । बाड़मेर गुड़ामनाली के प्रगतिशील किसान प्रतिनिधि ने केन्‍द्र वैज्ञानिकों से चर्चा के दौरान कृषि विज्ञान केन्‍द्र, गुडा मनाली में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में किसानों के हितार्थ की जा रही प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी तथा उष्‍ट्र पालन उद्यमिता से जुड़ी जानकारी के लिए निदेशक डॉ.साहू एवं केन्‍द्र वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया । 

 

 

स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर एनआरसीसी में राजभाषा कार्यशाला आयोजित

 भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र में आज ‘स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान’ विषयक राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो.पुरुषोत्तम परांजपे, सेवानिवृत्त आचार्य, डी, ए.वी.कॉलेज, अजमेर ने कहा कि देश की आजादी में वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा जिन्होंने जन मानस में स्वाभिमान की भावना को जगाया । अतिथि वक्ता ने प्रमुख रूप से तीन वैज्ञानिकों- जगदीश चन्द्र बसु, सी.वी.रमन, तथा प्रफुल्लचन्द्र राय की जीवनी एवं स्वतंत्रता में इनके महत्वपूर्ण योगदान का विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में जब वैश्विक स्तर पर यूरोप के आविष्कार एवं ज्ञान की तूती बजती थी तो इन वैज्ञानिकों ने भारतीय प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान को संपूर्ण विश्व के समक्ष रखा जिससे भारत के प्रति वैश्विक स्तर पर एक आदर का भाव उत्पन्न हुआ। प्रो.परांजपे ने साहित्यकारों के रूप में बंकिमचन्द्र चटर्जी, मुंशी प्रेमचन्द, दिनकर आदि के योगदान की सराहना की। अंत में उन्होंने कहा कि किसी भी देश समाज का वैज्ञानिक जब जागता है तो कोई भी लड़ाई जीतीं जा सकती हैं।
इस अवसर पर केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ.आर्तबन्धु साहू ने विषयगत व्याख्यान पर बोलते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन एवं इसमें विविध विधा से जुड़े विद्वानों के योगदान, किताबों में भी कई बार भलीभांति रूप से सामने नहीं आ पाता । उन्होंने मुख्य वक्ता की प्रशंसा करते हुए कहा कि व्याख्यान में जिस प्रकार से स्वतंत्रता में वैज्ञानिकों के योगदान का विश्लेषण किया गया है, इसकी दरकार है । डॉ.साहू ने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की विकास यात्रा को देखें तो कई रौचक बाते सामने आएंगे । उन्होंने कहा कि यदि हम चिंतन करें तो यह महसूस होगा कि भारत किसी से कम नहीं था, हमें भारतीयता पर गर्व करना चाहिए । डॉ.साहू ने इस मौके पर वैज्ञानिक लेखन को हिन्दी भाषा में अधिकाधिक बढ़ावा देने की बात भी कही।
केन्द्र के डॉ.सुमन्त व्यास, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी, राजभाषा ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को प्रस्तुत व्याख्यान से प्रेरित होकर नए तरीके से विश्लेषण करने हेतु प्रोत्साहित  किया। कार्यशाला में डॉ. एम.डी.शर्मा, विभागाध्यक्ष (भौतिक), राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर ने भी शिरकत की।

 

एनआरसीसी ने सीमा सुरक्षा बल के उष्‍ट्र प्रबंधकों को दिया प्रशिक्षण

भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसन्‍धान केन्‍द्र (एन.आर.सी.सी.) में दिनांक 20.08.2022 को आए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएस), बीकानेर के 74  उष्‍ट्र प्रबंधकों (हैन्‍डलर्स)  को ऊँटों के रखरखाव, स्‍वास्‍थ्‍य एवं आहार प्रबंधन आदि के सम्‍बन्‍ध में वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही इन कैमल हैन्‍डलर्स को केन्‍द्र  के महत्‍वपूर्ण स्‍थलों यथा- उष्‍ट्र डेयरी, उष्‍ट्र बाड़ों, उष्‍ट्र संग्रहालय, उष्‍ट्र दौड़ ट्रेक, बुल एक्‍सरसाइजर आदि का भ्रमण करवाते हुए संबंधित व्‍यावहारिक जानकारी भी दी गई ।

इस दौरान केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू द्वारा जवानों को एन.आर.सी.सी. द्वारा प्राप्‍त वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं गतिविधियों के बारे में संक्षिप्‍त में जानकारी देते हुए ऊँटों के वैज्ञानिक तरीकों से प्रबंधन एवं आहार आवश्‍यकताओं संबंधी पहलुओं पर विशेष ध्‍यान दिए जाने की बात कही। डॉ.साहू ने कहा कि यह केन्‍द्र ऊँटों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु इस प्रजाति के जनन, प्रजनन, शरीर कार्यिकी, पोषण, स्‍वास्‍थ्‍य, आनुवांशिकी, दूध आदि विविध पहलुओं पर प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की आवश्‍यकता होने पर केन्‍द्र अपनी सेवाएं देने हेतु तत्‍पर रहेगा।

केन्‍द्र के डॉ. आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक ने बीएसएफ के इस दल को ऊँटों के लिए प्रयुक्‍त किए जाने वाले आहार चारे की पहचान करवाने के साथ इनकी पौष्टिक आवश्‍यकताओं, आरामदायक आवास (सेल्‍टर) व्‍यवस्‍था, पशुओं हेतु स्‍वच्‍छता आदि विभिन्‍न पहलुओं के बारे में बताया वहीं केन्‍द्र के डॉ.काशी नाथ, पशु चिकित्‍सा अधिकारी द्वारा ऊँटों की स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को जरूरी बताते हुए उनमें पाए जाने वाले गंभीर रोगों की लक्षणों के आधार पर पहचान कर उनका समय पर उपचार करवाने एवं उचित समाधान हेतु पशु चिकित्‍सकीय परामर्श का सुझाव दिया।

उल्‍लेखनीय है कि बीएसएफ द्वारा प्रथम बार कैमल हैंडलिंग और मैनेजमेंट का यह कोर्स प्रारम्‍भ किया गया जिसमें 74 जवानों को इस छ: सप्‍ताह की ट्रेनिंग के बाद प्रशिक्षित जवान ऊँटों पर अपनी बटालियन में बॉर्डर की सुरक्षा का कार्य करेंगे। ऊँटों के स्‍वास्‍थ्‍य एवं प्रबंधन के उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए ही बीएसएस द्वारा केन्‍द्र के माध्‍यम से यह प्रशिक्षण दिलवाया गया । अंत में दल के प्रतिनिधि डॉ.सावरमल बिश्‍नोई, वेटरनरी कमान्‍डेंट ने एन.आर.सी.सी. में प्राप्‍त प्रशिक्षण को अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण बताते हुए इस हेतु केन्‍द्र निदेशक डॉ.साहू एवं वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया। 

 

एनआरसीसी ने मनाई आजादी का अमृत महोत्सव तहत 75वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ


भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर भारत की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ- 15 अगस्‍त, 2022 को केन्द्र-परिवार सहित एक स्मरणोत्सव के रूप में मनाया गया । सुबह झण्डारोहण कार्यक्रम में राष्ट्र गान के साथ ही एनआरसीसी का संपूर्ण परिसर ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
केन्द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्धु साहू ने 75 वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर झण्डारोहण करते हुए सर्वप्रथम इस पावन दिवस की सभी को बधाई संप्रेषित की तथा कहा कि देश की आजादी में हमारे महापुरुषों, वीर जवानों, ऋषियों, माताओं-बहनों, आमजन के त्यागमयी योगदान के कारण ही आज हम आजाद भारत की 75 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, अत: इसे ध्यान में रखते हुए हमें देश हित को सदैव सर्वोपरि रखना होगा । इस प्रकार की भावना हमारे राष्ट्र को उत्तरोत्तर विकास के पथ की ओर अग्रसर करेंगी ।
इस अवसर पर जिला पर्यावरण समिति, बीकानेर की ओर से केन्द्र को प्राप्त ‘‍हरित बिकाणा पुरस्कार 2022’ केन्द्र निदेशक डॉ.साहू को सौंपा गया । साथ ही उन्होंने केन्द्र के समाचार-पत्र व अनुसन्धान उपलब्धियों संबंधी पुस्तिका का भी विमोचन किया ।
आजादी के अमृत महोत्सव की वर्षगांठ पर केन्द्र द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया  गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नीरज के. पवन, संभागीय आयुक्त, बीकानेर ने  एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों हेतु डॉ. साहू को बधाई देते हुए कहा कि हम सभी को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का बखूबी निवर्हन करना चाहिए ताकि अनुसन्धान व प्रौद्योगिकी आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारा देश तीव्र गति से आगे बढ़ सके ।
केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आर्तबन्धु साहू ने संस्थागत विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति में सभी का समन्वित योगदान अत्यंत महत्व रखता है । उन्होंने केन्द्र अधिकारियों द्वारा किए गए नवाचारी प्रयासों को सदन के समक्ष रखते हुए इसकी सराहना की तथा सभी को मिल-जुलकर एनआरसीसी को आगे बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित किया ।
कार्यक्रम के विशिष्टि अतिथि श्री एन.राम, महाप्रबंधक, भारत संचार निगम लिमिटेड, बीकानेर ने देश विकास के साथ एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की । 
इस अवसर पर  संभागीय आयुक्त महोदय के कर कमलों से केन्द्र में लगे बीएसएनएल टॉवर, महाराजा गंगासिंह उष्ट्र सेना कोर तथा उष्ट्र आहार/चारा पोस्टरों, केन्द्र-गीत का विमोचन (लॉन्च) किया गया । सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागी बालक-बालिकाओं को पारितोषिक वितरित किए गए । साथ ही केन्द्र-गीत के रचयिता श्री श्याम ‘निर्मोही एवं गायक।/कम्पोजर श्री सुजीत कुमार को सम्मानित किया गया। अंत में धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा दिया गया।


 

एनआरसीसी द्वारा वित्त विषयक परिचर्चा का आयोजन

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोज्य कार्यक्रमों की श्रँखला में कार्यालयीन कार्यों के बेहतर प्रबन्धन एवं सम्बन्धित अद्यतन जानकारी संप्रेषित करने के प्रयोजनार्थ दिनांक 10 अगस्त, 2022 को एक वित्त परिचर्चा का आयोजन किया गया।
केन्द्र द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमान जी.पी.शर्मा, संयुक्त सचिव (वित्त), भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद, नई दिल्ली ने केन्द्र के अधिकारियों/कर्मचारियों से उनके कार्यक्षेत्र संबंधी विभिन्न पहलुओं/मुद्दों पर बातचीत की। श्री शर्मा ने कहा कि हम सभी सिस्टम का एक हिस्सा है तथा नियम संगत एवं निर्धारित प्रावधान के अनुसार अद्यतन जानकारी व इनमें कुशलता, कार्य निष्पादन को न केवल सहज व सरल बनाती है अपितु इससे समय व ऊर्जा की भी बचत होती है। उन्होंने परिचर्चा के दौरान वित्त संबंधी प्रावधानों एवं इनकी प्रक्रिया, पीएफएमएस (टीएसए), सीएनए तथा बाह्य अंशादित योजनाओं संबंधी आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी दी साथ ही जीएसटी, आईटीआर, कैमिकल्स रेट कॉन्ट्रेक्‍ट  आदि से जुड़ी जिज्ञासाओं का निराकरण भी किया ।
केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कौशल अभिवृद्धि से जुड़ी इस परिचर्चा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कार्मिकों को नियम संगत अद्यतन एवं पूरी जानकारी होने से उनके द्वारा निष्पादित कार्यों में न केवल समयबद्ध कार्य करने में सहायता मिलती है अपितु इससे पारदर्शिता भी बनी रहती है । डॉ.साहू ने विविध कार्यक्षेत्रों के तहत कार्य कुशलता को संस्थान की समग्र प्रगति में भी महत्ती रूप से सहायक बताया ।
परिचर्चा में एन.आर.सी.सी. के वैज्ञानिक, प्रशासनिक वर्ग के अधिकारी एवं कर्मचारी गणों के अलावा भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के बीकानेर स्थित भाकृअनुप-राष्ट्रीय अश्व अनुसन्धान केन्द्र एवं भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान संस्थान के अध्यक्षों, वैज्ञानिकों/संबंधित अधिकारियों, भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के वित्त एवं लेखाधिकारी  आदि सहित करीब 40 ने शिरकत की । अंत में श्री अखिल ठुकराल, प्रशासनिक अधिकारी ने सभी के प्रति धन्यवाद  ज्ञापित किया।

 

 

एनआरसीसी को मिला हरित बिकाणा पुरस्‍कार-2022’

भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसन्‍धान केन्‍द्र, बीकानेर को जिला पर्यावरण समिति बीकानेर की ओर से ‘’हरित बिकाणा पुरस्‍कार 2022’’ से नवाजा गया । जिला पर्यावरण  समिति एवं वन विभाग, बीकानेर के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दिनांक 09.08.2022 को आयोजित इस 73 वें जिला स्‍तरीय वन महोत्‍सव के अवसर पर संभागीय आयुक्‍त डॉ. नीरज के. पवन एवं  जिलाधीश श्री भगवती प्रसाद कलाल के कर कमलों से केन्‍द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्‍धु साहू को यह पुरस्‍कार प्रदान किया गया ।  उल्‍लेखनीय है कि बीकानेर जिले में ‘’हरितमा’’ को बढ़ावा देने हेतु किए गए संस्‍थागत श्रेणी के तहत राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसन्‍धान केन्‍द्र को प्रथम पुरस्‍कार स्‍वरूप प्रशस्ति पत्र से सम्‍मानित किया गया ।
इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि डॉ. नीरज के. पवन ने आमजन को अधिकाधिक पेड़-पौधे लगाने हेतु प्रोत्‍साहित किया वहीं विशिष्‍ट अतिथि श्री भगवती प्रसाद कलाल ने कम पानी की आवश्‍यकता वाली स्‍थानीय वनस्‍पतियों यथा- जाल, खेजड़ी, बेर, सहजन आदि लगाने की बात कहीं ।
इस अवसर पर केन्‍द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्‍धु साहू ने पुरस्‍कार प्राप्ति पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि इसके पीछे केन्‍द्र के सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के अथक व समन्वित प्रयास निहित है । उन्‍होंने जिला स्‍तर पर केन्‍द्र को इस पुरस्‍कार से नवाजा जाने को गौरव का विषय बताते हुए पूरे केन्‍द्र परिवार को बधाई संप्रेषित की ।  डॉ.साहू ने विषयगत बात रखते हुए आस-पास के क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने की अपील की ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पशुओं के लिए पर्याप्‍त चारा उत्‍पादित हो सके तथा पशुपालकों को उनकी आमदनी में लाभ भी मिल सकेगा।
वन महोत्‍सव के इस अवसर पर केन्‍द्र के डॉ.आर. के. सावल, प्रधान वैज्ञानिक, श्रीमती प्रियंका गौतम, प्रभारी चरागाह एवं चारा इकाई, श्री महेन्‍द्र कुमार राव आदि के साथ-साथ वन विभाग, बीकानेर, सीमा सुरक्षा बल,  एवं विभिन्‍न जिला कार्यालयों के अधिकारियों/कर्मचारियों एवं स्‍कूली बच्‍चों ने भी शिरकत की।

 

 

 

एन.आर.सी.सी. द्वारा मानसून पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोज्य कार्यक्रमों की श्रृँखला में दिनांक 05.08.2022 को मानसून पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । केन्द्र  के सामुदायिक भवन के परिसर में आयोजित इस पौधारोपण कार्यक्रम के तहत खेजड़ी (40) एवं अरडू (160) के कुल 200 पौधे लगाए गए ।

केन्द्र के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री वी.एस. जोरा, उप वन संरक्षक, वन विभाग, बीकानेर ने केन्द्र परिसर तथा इसके कृषि परिक्षेत्र में स्थानीय वनस्पतियों/पेड़ों युक्त आच्छादित हरियाली का अवलोकन करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की तथा कहा कि एन.आर.सी.सी. द्वारा सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र (माइक्रो-क्लाइमेट) का बेहतरीन स्वरूप में विकास किया गया है जो कि इस परिवर्तित परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण एवं विकास की दिशा में एक महत्ती आवश्यकता है । उन्होंने केन्द्र निदेशक डॉ. साहू  को इस हेतु बधाई संप्रेषित करते हुए इस दिशा में अधिकाधिक कार्य करने हेतु एनआरसीसी परिवार का विशेष रूप से उत्साहवर्धन भी किया  ।

इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्धु साहू ने कहा कि एक अनुसन्धान संस्थान होने के साथ-साथ एनआरसीसी वैश्विक स्तर पर अपनी पर्यटनीय छवि के लिए भी जाना जाता है तथा प्रतिवर्ष हजारों सैलानी इस केन्द्र का भ्रमण करने आते हैं, ऐसे में यह केन्द्र उष्ट्र प्रजाति के विकास एवं संरक्षण के उद्देश्य से कैमल-इको टूरिज्म के विकास पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित कर रहा है । साथ ही घने पेड़ों, सुंदर उद्यानों तथा स्वच्छ वातावरण युक्त एक पर्यटन स्थल होने के कारण भी आमजन में दिन-ब-दिन केन्द्र के प्रति आकर्षण खासा बढ़ रहा है । इसे परिलक्षित करते हुए पर्यावरण को लेकर हमारा केन्द्र संजीदा है ।

केन्द्र की श्रीमती प्रियंका गौतम, वैज्ञानिक एवं प्रभारी चरागाह एवं चारा इकाई (जी.एफ.यू.) ने  पौधारोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रकाश डालते हुए इसे सार्थक बनाने हेतु सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।

 

एनआरसीसी द्वारा हुसंगसर गाँव में पशु शिविर का आयोजन

बीकानेर 30 जुलाई 2022  । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्‍धान केन्द्र द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के तहत बीकानेर के हुसंगसर गांव में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केन्द्र की इस गतिविधि में गाँव के 94 पशुपालकों एवं किसानों ने 884 पशुओं- गाय-539, भैंस-18, ऊँट-03, बकरी-224 एवं भेड़-100 सहित भाग लिया। 
इस अवसर पर पशुपालकों को सम्बोधित करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि परिवर्तित जलवायु में पशुपालन व्यवसाय के संरक्षण एवं विकास में अद्यतन ज्ञान का विशेष महत्व है। परम्परागत पद्धति के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से भी पशुओं के प्रबन्धन से व्यवसाय सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं का उन्मूलन होने में सहायता मिलती है तथा इससे भरपूर उत्पादन द्वारा अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है। डॉ. साहू ने भारत सरकार की पशुपालकों के कल्याणार्थ विभिन्न योजनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करवाते हुए इनके माध्यम से होने वाले प्रदत्त लाभों के प्रति जागरूकता रखने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिविर के माध्यम से वितरित दवाइयों को उचित उपयोग में लाया जाना चाहिए ताकि योजनाओं की सार्थकता सिद्ध हो सके। पशुपालकों को हाल में चल रही लम्पी बीमारी सम्बन्धी जिज्ञासाओं के बारे में डॉ. साहू ने  कहा कि रोगग्रस्त पशुओं का दूध उबाल कर उपयोग में लाया जाए तथा बाड़ों आदि की उचित साफ-सफाई की जाए ताकि अन्य पशुओं में बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।
केन्द्र की अनुसूचित जाति उप-योजना के नोडल अधिकारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ.आर.के.सावल, ने कहा कि कृषक-वैज्ञानिक संवाद के दौरान पशुपालकों की समस्याओं/जिज्ञासाओं का उचित निराकरण करते हुए उन्हें ऋतुओं के अनुसार पशुओं की उचित देखभाल करने, उनके लिए पर्याप्त आहार एवं पौष्टिक चारे आदि  की पूर्ति, स्वास्थ्य प्रबंधन आदि के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर पशु पालकों को केन्द्र में निर्मित पशुओं के पौष्टिक आहार (संतुलित पशु आहार) व खनिज मिश्रण का भी वितरण किया गया तथा केन्द्र उत्पादित पौष्टिक नेपियर घास के बारे में भी जानकारी दी तथा घास के करीब 500 पौध (कटिंग) पशुपालकों में वितरित की गई ताकि पशुपालक वर्षभर चारा ले सके।
इस अवसर पर केन्द्र की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमनिल ने शिविर में लाए गए पशुओं में होने वाली बीमारियों संबंधी चर्चा की तथा पाई गई बीमारियों के उपचार हेतु दवा दी गई तथा उचित समाधान बताया गया।
हुसंगसर गांव के श्री शिवजी, सरपंच ने केन्द्र सरकार की इस योजना के महत्व का जिक्र करते हुए इसके सफल क्रियान्वयन में एनआरसीसी की सक्रियता को सराहा। इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में केन्द्र के श्री मनजीत सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग दिया।


 

A team of travel agents/ tour operators from different states of India visited NRCC on 26 July 2022. They explored tourism facilities available at NRCC and interacted with the Director and Scientists of the institute.

 

ऊँट की अपशिष्ट ऊन निर्मित थैलियों युक्त नर्सरी (पौधशाला) का शुभारम्भ

 

28.07.2022  । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर शँखलाबद्ध कार्यक्रमों के तहत ऊँट-भेड़ की अपशिष्ट ऊन (वेस्ट-वूल) निर्मित थैलियों युक्त नर्सरी (पौधशाला) का शुभारम्भ किया गया। केन्द्र द्वारा इन ऊन निर्मित थैलियों में स्थानीय वनस्पतियों- जाल, खेजड़ी, रोहिड़ा, अरडू आदि की पौध तैयार की गई है।
केन्द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने इस नर्सरी के शुभारम्भ के अवसर पर कहा कि ऊँट-भेड़ की अपशिष्ट ऊन (वेस्ट-वूल) निर्मित थैलियों में स्थानीय वनस्पतियों की पौध तैयार करने के पीछे मुख्य ध्येय केन्द्र की कृषि परिक्षेत्र स्थित चरागाह भूमि को उपजाऊ बनाना है, साथ ही इसमें प्लास्टिक के स्थान पर प्रयुक्त थैलियाँ, पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी लाभदायक है। यह सेपलिंग बैग, पौधों की बढ़ोत्तरी हेतु सहायक बन, खाद का काम करेंगे। डा. साहू ने कहा कि जाल, रोहिड़ा, खेजड़ी आदि सर्वोच्च (एपेक्स) वनस्पतियों की श्रेणी में आते हैं तथा इनकी कमी से संपूर्ण पर्यावरण प्रभावित होता है। इन वनस्पतियों की उपलब्धता के साथ-2 ऊँटों को आहार चारे के रूप में खास पसन्द का पौष्टिक चारा मिल सकेगा बल्कि इनसे पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा।
केन्द्र वैज्ञानिक श्रीमती प्रियंका गौतम ने नर्सरी के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि अभी तक इन सेपलिंग बैग में स्थानीय वनस्पतियों की 500 पौध तैयार की गई है तथा कृषि वानिकी अधिकाधिक पौध तैयार कर उपलब्ध करवाएगा। इस अवसर पर केन्द्र स्टाफ द्वारा पौष्टिक घास ‘नेपियर‘ के करीब 250 से अधिक पौधे भी लगाए गए।

 

एनआरसीसी ने खींचिया में किया पशु शिविर व कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन

बीकानेर 20 जुलाई 2022  । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्‍धान केन्द्र (एन.आर.सी.सी.) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के तहत आज जामसर के पास गांव खींचिया में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें खींचिया एवं आस-पास क्षेत्र के 46 पशुपालकों एवं किसानों ने 197  पशुओं सहित (जिनमें गाय-95, भैंस-14, भेड़-12 व बकरी-76 शामिल) केन्द्र के इस कार्यक्रम में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।

परिचर्चा में केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत भारत सरकार अनुसूचित जाति के कल्याणार्थ देश के ग्रामीण अंचलों में जरूरतमंदों को बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति कर उन्हें समाजार्थिक दृष्टिकोण से खुशहाल बनाने हेतु सतत प्रयत्नशील हैं। डॉ.साहू ने वर्तमान में चल रही लम्पी स्किन डीजिज में पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि पशुपालक,  सावधानी बरतते हुए इस बीमारी से अपने पशुओं का बचाव कर सकते हैं, बचाव ही इसका श्रेष्ठ उपाय है। उन्होंने उत्तम पशु आहार के माध्यम से पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए इस बीमारी से उभरने में सहायता मिलने की बात कही। डॉ. साहू ने कहा कि बदलते दौर में पशुधन व्यवसाय संबंधी परंपरागत ज्ञान के साथ-साथ अद्यतन जानकारी किसान के पास होने पर वे श्रेष्ठ उत्पादन द्वारा अपनी आजीविका को और अधिक बेहतर ढंग से चला सकेंगे। डॉ.साहू ने केन्द्र द्वारा ऊँट विकास एवं संरक्षण हेतु किए जा रहे नूतन आयामों एवं प्रसार गतिविधियों की जानकारी देते हुए पशुपालकों को एन.आर.सी.सी. के भ्रमण एवं प्रशिक्षण हेतु भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया।

भाकृअनुप-एन.आर.सी.सी. में चल रही इस एससीएसपी उप-योजना के नोडल अधिकारी डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि कार्यक्रम में पशुपालकों के साथ पशुपालन व्यवसाय सम्बन्धी विभिन्न पहलुओं एवं समस्याओं पर खुलकर चर्चा की गई।  साथ ही पशुओं के लिए आहार चारे के रूप में पौष्टिक नेपियर घास के बारे में भी जानकारी देते हुए इस घास के पशुपालकों को सैम्पल बांटे गए। साथ ही केन्द्र में निर्मित पशुओं के पौष्टिक आहार (संतुलित पशु आहार) व खनिज मिश्रण का भी वितरण किया गया।

इस दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. शान्तनु रक्षित, वैज्ञानिक ने पशुओं की शारीरिक क्रियाओं एवं विद्यमान क्षमताओं के संबंध में कहा कि पशुओं की धीमी शारीरिक वृद्धि एवं कम दुग्ध-उत्पादन क्षमता की ओर पशुपालकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.काशी नाथ एवं डॉ. सुमनिल ने शिविर में लाए गए पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पशुओं में ज्यादात्तर चींचड़, भूख कम लगना,  पेट में कीड़े पड़ने आदि रोग देखे गए जिनके उपचार हेतु पशुओं को दवा दी गई तथा उचित समाधान बताया गया।
खींचिया गांव के श्री केशुराम, वार्ड मेम्बर ने भारत सरकार की इस योजना के महत्व का जिक्र करते हुए इसके सफल क्रियान्वयन में एनआरसीसी की सक्रियता को सराहा। इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में केन्द्र के श्री मनजीत सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।

 

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें कृषि वानिकी परिक्षेत्र एवं अतिथि गृह परिसर के पास शहतूत (100) व खजूर (50) के पौधे लगाए गए।

 

ग्रान्धी गाँव में बीमार ऊँटों की सुध लेने पहुँचा एनआरसीसी दल

 

बीकानेर 11 जुलाई 2022 l हाल ही में ग्रान्धी गांव मे ऊँटों के टोले की बीमारी संबंधी प्रकाशित समाचार सूचना के आधार पर भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों का दल आज ऊँटों की सुध लेने ग्रान्धी गांव पहुंचा.

एनआरसीसी के दल में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के.सांवल ने बताया कि ग्रान्धी गांव के ज्ञानाराम के इस टोले से लगभग 110 के करीब ऊँटों की जांच की गई तथा इनके खून एवं मिंगनी के नमूने एकत्रित किए गए. इस दौरान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शांतनु रक्षित ने पशु उत्पादन, स्वास्थ्य व स्वच्छता, पोषण आदि विभिन्न पहलुओं की पशुपालक को जानकारी होना अपेक्षित बताया. वहीं केंद्र के डॉ. काशीनाथ, पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस टोले में तिबरसा रोग के बचाव हेतु टीकाकरण भी किया गया. कमजोर जानवरों को पेट की दवा तथा बाह्य परजीवी चीचड़ से बचाव हेतु परजीवी नाशक दवा व मिनरल मिक्सचर वितरित किया गया.

एनआरसीसी के निदेशक डॉ. आर्तबंधु साहू ने दल से दूरभाष पर संपर्क कर स्पष्ट जानकारी लेते हुए बताया कि केंद्र, उष्ट्र विकास व संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है. प्रकाशित समाचार और उरमूल सीमांत संस्था बज्जू से संपर्क कर इस दल को तुरंत वहां भेजा गया तथा जांच हेतु बीमार ऊँटों की सेंपलिंग की गई है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुधन आधारित आजीविका को देखते हुए पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी आपात स्थिति को प्रमुखता से लिया जाता है. केंद्र समय-समय पर पशु स्वास्थ्य शिविर आदि के माध्यम से ऊँटों के स्वास्थ्य व श्रेष्ठ प्रबंधन के अलावा इस प्रजाति के दूध के औषधीय महत्त्व व पर्यटनीय संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है ताकि बदलते दौर में ऊँट को एक उद्यम के रूप में अपनाकर ऊँट पालक भाई अपनी आजीविका आराम से चला सकें.

उरमूल सीमांत संस्था बज्जू के मोतीलाल व केंद्र के दल में शामिल अमित कुमार द्वारा ऊँटों की सैंपलिंग आदि कार्यों में सहायता प्रदान की गई. एनआरसीसी के इस दल के प्रति ऊँटों के टोले के स्वामी ज्ञानाराम ने आभार व्यक्त किया व आशा जताई कि उनके बीमार पशुओं को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा.

 

एनआरसीसी ने मनाया ‘वर्ल्ड जूनोसिस डे‘

बीकानेर 06 जुलाई 2022  । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र द्वारा आज ‘‘वर्ल्ड जूनोसिस डे (विश्व  पशुजन्यरोग दिवस)’’ के अवसर पर ‘परजीवी जूनोसिस : एक कठिन चुनौती‘ (पैरासाईट जूनोसिस : एन अप‍हिल चैलेंजेज्)‘ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें एनआरसीसी वैज्ञानिकों ने विषयगत गहन विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर केन्द्र के निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आर्तबन्धु साहू ने सेमीनार से जुड़ते हुए कहा कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पशुजन्य रोगों के संबंध में पशु पालकों, पशु हित धारकों, पशु चिकित्सकों, अनुसंधानकर्ताओं एवं संबद्ध स्वास्थ्य कर्मियों को उपयोगी एवं अद्यतन जानकारी संप्रेषित करना है। उन्होंने कहा कि फील्ड क्षेत्र में जूनोटिक बीमारियों संबंधी संक्रमण के प्रति अधिकाधिक जागरूकता लाई जानी चाहिए, पशुपालकों एवं किसानों को प्रेरित किया जाए ताकि उन्हें एवं उनके पशुओं को इन संक्रमणों के प्रति सुरक्षा प्रदान की जा सके। डॉ.साहू ने जूनोटिक बीमारियों से बचाव एवं रोकथाम हेतु समन्वित प्रयासों पर भी बल दिया।

इस वेबिनार में विषय-विशेषज्ञ के रूप में केन्द्र के डॉ. एस.के.घौरूई, प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक ने विषयगत व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि अधिकांश मानवीय बीमारियां पालतू व जंगली पशुओं से प्रसारित होती है। उन्होंने जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण को अत्यंत जरूरी बताते हुए कहा कि भारत देश में जूनोटिक बीमारियों जैसे  रेबीज, ब्रुसेलोसिस, टोक्सोप्‍लाजमोसिस, ट्रिपेनोसोमियसिस आदि  प्रमुख रूप से देखी जा सकती है। उन्‍होंने इन बीमारियों की रोकथाम हेतु पशुओं के बेहतर प्रबंधन, नियमित निगरानी, आमजन में रोगों के प्रति जागरूता बढ़ाने तथा पशुओं एवं मनुष्यों में उभरते रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। वक्‍ता डॉ. घौरूई ने चेताया कि एनसीडीसी के अनुसार 75 प्रतिशत उभरते एवं पुन: उभरने वाले वाले संक्रमण जूनोटिक है।

केन्द्र द्वारा जूनोसिस डे पर आयोजित इस राष्ट्रीय वेबिनार में देशभर के करीब 52 से अधिक अनुसंधान कर्ता, विद्यार्थी गण आदि ने सहभागिता निभाई तथा प्रश्‍न-सत्र में अपनी जिज्ञासाओं को रखा जिनका विषय-विशेषज्ञों द्वारा उचित निराकरण प्रस्तुत किया गया।

इस वेबिनार कार्यक्रम में डॉ. आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा जूनोसिस डे मनाए जाने के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला गया।

 

 

एनआरसीसी ने मनाया विश्व ऊँट दिवस

ऊँट पालक ऊँटनी के दूध का अधिकाधिक उत्पादन करें : प्रो.गर्ग

 

बीकानेर 22 जून 2022 । भाकृअनुप- राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र तथा वैश्विक अनुसंधानों से अब यह साबित हो चुका है कि ऊँटनी के दूध में भरपूर औषधीय गुण विद्यमान हैं, ऐसे में ऊँट पालकों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक ऊँटनी के दूध का उत्पादन करें और इस हेतु एक बाजार/मार्केट तैयार किया जाए ताकि उन्हें अच्छी -खासी आमदनी प्राप्त हो सके। ये विचार आज भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र द्वारा आयोजित विश्व ऊँट दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) एस.के.गर्ग, माननीय कुलपति, राजुवास, बीकानेर ने व्यक्त किए।प्रो.गर्ग ने एनआरसीसी परिवार को ‘विश्व ऊँट दिवस’ की बधाई संप्रेषित करते हुए कहा कि प्रदेश में ऊँटों की लगातार घटती संख्या एवं सामयिक परिदृश्य में इसकी उपादेयता को बनाए रखने के लिए चिंतन आवश्‍यक है, इस हेतु राजकीय पशु ‘ऊँट’ पर राज्य से अन्यत्र ले जाने के नियमों में भी शिथिलता बरती जानी अपेक्षित है। केन्द्र के उष्ट्र संरक्षण एवं विकास में महत्ती योगदान का उल्लेख करते हुए कुलपति महोदय ने इस प्रजाति की संख्या व उपयोगिता में आए समग्र बदलाव (कारण) संबंधी नीतिगत प्रस्ताव, सरकार को प्रस्‍तुत किए जाने की भी मंशा जताई। प्रो.गर्ग ने इस दौरान ऊँट पालकों से पारस्परिक वार्ता भी की।
केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में ऊँटों की निरंतर बढ़ती संख्या (प्रतिशत) एवं इसकी उपयोगिता, दूसरी ओर भारत में इसकी घटती संख्या एवं कम होता महत्व चिंता का विषय है। डॉ. साहू ने कहा कि यह प्रजाति न केवल प्राचीन समय से बल्कि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, और अगर ऊँट को ‘औषधि भण्‍डार’ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैज्ञानिक अनुसंधान से ज्ञात हुआ है कि ऊँटनी का दूध, विभिन्न मानव रोगों यथा-मधुमेह, क्षय रोग, ऑटिज्म आदि में कारगर है। लेकिन इसकी औषधीय महत्व का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए ऊँट पालकों को सीधे तौर पर एवं सामूहिक रूप से आगे आना होगा। डॉ.साहू ने उपस्थित ऊँट पालकों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ऊँटनी के दूध का उत्पादन, उसका संग्रहण तथा आमजन तक उपलब्धता हेतु इसका वितरण आदि की सुगम व्यवस्था की जानी होगी जिससे दुग्ध व्यवसाय से वे भरपूर मुनाफा कमा सके। उन्होंने ‘कैमल इको टूरिज्‍म’ की बात रखते हुए केन्द्र द्वारा इस क्षेत्र में पर्यटनीय सुविधाओं के विकास संबंधी पहल से पर्यटकों का आकर्षण बढ़ने एवं इनसे लाभ मिलने की भी बात कहीं।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्री भानुप्रताप ढाका, उप निदेशक, पर्यटन विभाग ने कहा कि प्रदेश की संस्कृति में अपने महत्ती योगदान के कारण ‘ऊँट’ की गहरी पेठ है। उन्होंने ऊँट की जीव्यता बनाए रखने के लिए जैविक खेती में इसके उपयोग पर जोर दिया साथ ही उष्ट्र प्रजाति को नए राज्यों में बढ़ावा दिए जाने हेतु ‘उष्ट्र डेयरी’ या ‘पर्यटनीय-सजावटी ऊँट’ जैसे मॉडल तैयार करने की अपेक्षा जताई। इस दौरान विशिष्ट अतिथि डॉ.दिलीप कुमार समादिया, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने एनआरसीसी को उष्ट्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि विज्ञान का काम नव निर्माण करना है तथा इस हेतु वैज्ञानिक, बागवानी खेती (चारा फसल आदि सहित) से पशुपालन व्यवसाय को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने हेतु प्रयासरत है ताकि ऊँट, भेड़, बकरी आदि पशुपालन में संबंल प्राप्त हो सके। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.के.सिंह, अधिष्ठाता, सी.वी.ए.एस., राजुवास, बीकानेर ने ऊँटनी के दूध की विभिन्न मानव बीमारियों में औषधीय उपयोगिता पर अपनी बात रखी। इस अवसर पर किसान प्रतिनिधि के रूप में श्री श्रीगोपाल उपाध्याय, पूर्व सरपंच, मेघासर ने एनआरसीसी द्वारा उष्ट्र प्रजाति के विकास में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की वहीं ऊँट पालक सबीर खां ने ऊँट पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी आवश्यकताओं का उल्लेख किया।

विश्व ऊँट दिवस के उपलक्ष्‍य पर एनआरसीसी द्वारा मुख्य तौर पर उष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें बीकानेर सहित जिले के विभिन्न गांवों यथा- सुजानेदसर, करमीसर, गड़सीसर, भोजूसर, बछासर, श्रीरामसर, उदयरामसर, शिवबाड़ी, कोटड़ी, जैतासर, गाढवाला, केशरदेसर आदि के ऊँट पालकों ने अपने पशुओं सहित शिरकत की। ऊँट पालकों को केन्‍द्र द्वारा विकसित मिश्रित पशु आहार व दाना आहार भी वितरित किया गया। वहीं इस अवसर पर आयोजित सर्वश्रेष्‍ठ नर ऊँट प्रतियोगिता में इमरान खान ने प्रथम, रफीक खान ने द्वितीय, नैनूराम ने तृतीय तथा मुरली गहलोत व महमूद खान ने सांत्‍वना पुरस्कार अर्जित किया वहीं सजावटी ऊॅट प्रतियोगिता में संजय खान ने प्रथम, इमरान ने द्वितीय, महमूद ने तृतीय तथा सांत्वना पुरस्‍कार नैनूराम प्राप्त किया। सभी विजेताओं को प्रशस्ति पत्र व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। डॉ. वेद प्रकाश, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक द्वारा सभी के प्रति धन्‍यवाद ज्ञापित किया गया।

 

भाकृअनुप-उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में सहभागिता
भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एन.आर.सी.सी.), बीकानेर ने अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्‍य पर


स्‍वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्‍वविद्यालय, बीकानेर के प्रांगण में 21 जून, 2022 को आयोजित सामूहिक मुख्‍य कार्यक्रम में उत्‍साहपूर्वक भाग लिया। विश्‍वविद्यालय के निदेशालय छात्र कल्‍याण तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा केन्‍द्र के संयुक्‍त तत्‍वावधान में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत आयोजित सामूहिक योग दिवस के इस कार्यक्रम में एन.आर.सी.सी.सहित केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार के अन्‍य विभिन्‍न संस्‍थानों/केन्‍द्रों/बैंक/संस्‍थाओं आदि ने इसमें सक्रिय सहभागिता निभाते हुए इसे सफल बनाया। योगाभ्‍यास से पूर्व सामूहिक कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि डॉ.आई.पी.सिंह, अधिष्‍ठाता, स्‍वा.के.राज.कृ.वि., बीकानेर ने अपने अभिभाषण में कहा कि जीवन की समग्र स्‍वस्‍थता हेतु शारीरिक व आध्‍यात्मिक बल दोनों आवश्‍यक है और खासकर आध्‍यात्मिक बल के होने पर प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जूझ सकते हैं। डॉ.सिंह ने योग विधा को प्राचीन भारत की अमूल्‍य धरोहर बताते हुए इसके माध्‍यम से मानसिक व शारीरिक संतुलन बनाए रखने की बात कही। इस अवसर पर केन्‍द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्‍धु साहू ने अपने संबोधन में भारत के नेतृत्‍व में वैश्विक स्‍तर पर मनाए जा रहे अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस को गौरव के रूप में लेने की बात कही। डॉ.साहू ने योग के महत्व एवं इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ संबंधी विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम, अपनी जीवन शैली में योग को अपनाकर पूर्णतया स्‍वस्थ शरीर प्राप्‍त कर सकते हैं। उन्‍होंने सभी को भारतीय परम्‍पराओं एवं जीवन मूल्‍यों से जुड़ते हुए सकारात्मक भाव से कार्य करने हेतु प्रोत्‍साहित किया तथा रोजमर्रा की दिनचर्या में योग को शामिल किए जाने का आह्वान किया। इस दौरान अन्‍य संस्‍थानों/केन्‍द्रों आदि के प्रमुखों ने भी अपने-अपने विचार रखे। तत्‍पश्‍चात् अंतर्राष्‍ट्रीय कॉमन योगा प्रोटोकॉल के तहत योग संबंधी विभिन्‍न क्रियाओं जैसे कि – ताड़ासन, वज्रासन, उष्‍ट्रासन, शलभासन, शवासन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति आदि का व्‍यावहारिक अभ्‍यास करवाया गया।
सामूहिक योग प्रदर्शन के मुख्‍य कार्यक्रम में सहभागिता के उपलक्ष्‍य पर आयोजकों की ओर से
एन.आर.सी.सी. सहित सहभागी सभी सस्‍थानों/केन्‍द्रों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया। अंत में डॉ. देवाराम काकड़, निदेशक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा केन्‍द्र, स्‍वा.के.राज.कृ.वि.कैम्‍पस, बीकानेर ने सभी के प्रति धन्‍यवाद ज्ञापित किया। केन्द्र के नोडल अधिकारी (अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस) डॉ. सुमन्त व्यास, प्रधान वैज्ञानिक ने केन्‍द्र परिवार के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्‍यक्‍त किया।

 

 

आई सी ए आर कृषि प्रोद्योगिकियों का मेगा शो व किसान मेला - 31 मई 2022

गरीब कल्याण सम्मलेन शत प्रतिशत सशक्तिकरण

 

 

एनआरसीसी द्वारा जन जातीय पशुपालकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

बीकानेर 28.05.2022 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर द्वारा जन जातीय उपयोजना के अंतर्गत ‘उष्‍ट्र पालन : व्‍यावसायिक चुनौतियां एवं आजीविका सुरक्षा’  विषयक तीन दिवसीय  प्रशिक्षण कार्यक्रम (26 से 28 मई, 2022)  का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में सिरोही जिले के माउंट आबू रोड़ तहसील के 20 पशु पालकों ने इसमें भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ.बी.एन.त्रिपाठी, उप महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों के लिए पशुधन, बतौर संपत्ति के रूप में साबित हुआ है क्‍योंकि यहां के किसान/पशुपालक के लिए किसी भी प्रकार की आपदा व आर्थिक तंगी में भी, यह संबल प्रदान करते हैं। उन्‍होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कार्यप्रणाली एवं किसानों के लिए निर्धारित बजट प्रावधान से भी प्रशिक्षणार्थियों को अवगत करवाया तथा कहा कि यद्यपि परिषद अधीनस्‍थ सभी संस्‍थानों के वैज्ञानिक गण प्रतिबद्ध भाव से देश के किसानों के लिए कार्य कर रहे हैं तथापि उन्‍हें सतत प्रेरित भी किया जाता है कि वे फील्‍ड में जाकर किसानों व पशुपालकों की समस्‍याओं से रू-ब-रू हों, उनकी जिज्ञासाओं का उचित निराकरण करें। क्‍योंकि अपनी खेती व पशुधन को लेकर जब देश का किसान खुशहाल होगा, तो देश और अधिक समृद्ध बन सकेगा। डॉ.त्रिपाठी ने किसानों के साथ उष्‍ट्र व्‍यवसाय को लेकर भी चर्चा की तथा खासकर क्षेत्र में ऊँटनी के दुग्‍ध व्‍यवसाय की स्थिति को भी जाना तथा कहा कि एनआरसीसी इस हेतु श्रेष्‍ठ दुग्‍ध उत्‍पादन करने वाली ऊँटनियों का वितरण कर सीधे तौर पर दुग्‍ध व्‍यवसाय से जुड़े पशुपालकों को लाभ पहुंचा सकता है ।

इस अवसर पर केन्‍द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्‍धु साहू ने पशुपालकों के हितार्थ की जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि केन्‍द्र द्वारा जन जातीय उपयोजना के तहत माउंट आबू के क्षेत्र में पशुपालकों को प्रशिक्षण और उनके साथ संवाद के माध्‍यम से पशुधन से जुड़ी नूतन प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी जाती है साथ ही इस क्षेत्र में केन्‍द्र द्वारा ‘ऊंटां री बातां’ कार्यक्रम को आकाशवाणी के माध्‍यम से प्रसारित करवाया जा रहा है ताकि पशुपालकों के बीच उचित जानकारी पहुंच सके।

इस दौरान उप महानिदेशक महोदय का पशुपालकों द्वारा राजस्‍थानी पगड़ी पहनाकर सम्‍मान किया गया। किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर श्री सेवाराम ने पशु उत्‍पादन में विपणन संबंधी समस्‍याओं के बारे में वस्‍तुस्थिति से अवगत कराया । साथ ही उन्‍होंने जन जातीय उपयोजना तहत एनआरसीसी द्वारा उपलब्‍ध करवाई जा रही पशु स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पशुओं के स्‍वास्‍थ्‍य तथा बीमारियों के इलाज हेतु उचित दवाइयां व इंजेक्शन आदि की सुविधाएं मिलने से पशु व्‍यवसाय में लाभ प्राप्‍त हुआ है।

कार्यक्रम समन्‍वयक डॉ.आर.के.सावल ने कहा कि ऊँट की उपयोगिता, मांगलिक अवसरों, राष्‍ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हॉटल व्‍यवसाय में पर्यटन प्रयोजनार्थ बढ़ रही है, इस दृष्टिकोण से पशुपालक रूचि लेते हुए अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। डॉ.सावल ने ऊँटनी के दूध के प्रसंस्‍करण व आकर्षक पैकेजिंग आदि के बारे में भी प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा की ताकि विपणन के क्षेत्र में ऊँटनी के दूध को और अधिक बढ़ाया जा सके। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में उष्‍ट्र पालन एवं इस व्‍यवसाय से जुड़ी चुनौतियों के बारे में व्ध्‍यान आकर्षित किया गया

पशुपालकों को ऊँटनी के दूध एवं पर्यटन से संबंधित केन्‍द्र के प्रयासों के बारे में व्‍यावहारिक जानकारी देने हेतु उन्‍हें केन्‍द्र की उष्‍ट्र डेयरी, उष्‍ट्र बाड़ों एवं पर्यटनीय स्‍थलों का भ्रमण भी करवाया। पशुओं की दूध उत्‍पादन क्षमता को बढ़ाने हेतु उन्‍हें फीड उत्‍पादन इकाई का भ्रमण करवाते हुए उन्‍हें पैलेट फीड व मिनरल मिक्‍स्‍चर भी वितरित किया गया। 

 

नए एमओयू तहत एनआरसीसी देगा उष्‍ट्र उत्‍पादों संबंधी लघु उद्योग विकास हेतु किसानों एवं उद्यमियों को प्रोत्‍साहन एवं प्रशिक्षण

 

बीकानेर 12 मई 2022 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र (एनआरसीसी)  एवं ए-आइडिया-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (नार्म), हैदराबाद के बीच एक नया एमओयू हुआ है। एनआरसीसी के निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू एवं नार्म, हैदराबाद के निदेशक डॉ. श्रीनिवास राव ने नार्म संस्‍थान में इस महत्‍वपूर्ण एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि एनआरसीसी तथा ए-आइडिया के इस एमओयू के तहत यह केन्‍द्र, ऊँट के विभिन्‍न पहलुओं से जुड़े उत्‍पादों के उत्‍पादन, प्रसंस्‍करण एवं उद्योग में रूचि रखने वाले किसानों एवं उद्यमियों को अपना लघु उद्योग लगाने एवं इसे विकसित करने में सहयोग प्रदान कर सकेगा । वहीं इन दोनों संस्‍थानों के तकनीकी विशेषज्ञ पारस्‍परिक समन्‍वय के द्वारा इस क्षेत्र में रूचि रखने वाले युवाओं, उद्यमियों  को तकनीकी व बुनियादी जानकारी एवं कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण उपलब्‍ध करवाएंगे। डॉ.साहू ने कहा कि संस्‍थानों से जुड़े नवोन्‍मेषी उष्‍ट्र उत्‍पादों एवं सह उत्‍पादों का समग्र तौर एवं विविध स्‍तर-स्थिति पर आकलन (इन्क्‍यूबेशन) करेंगे तथा उष्‍ट्र पालन व्‍यवसाय से जुड़े उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं जन्‍म ले सकेगी तथा इसे, एक महत्‍वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। डॉ. साहू ने इको-टूरिज्‍म (पारिस्थितिक पर्यटन) के तहत उद्यमिता के अवसर के रूप में आशा व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि इससे पर्यटनीय विकास, नए आयामों के रूप में मुखरित करने में महत्‍ती सहायता मिल सकेगी।    

उल्‍लेखनीय है कि एनआरसीसी से एमओयू तहत जुड़े ए-आइडिया (एसोशियशन ऑफ इनोवेशन डवलपमेंट फॉर एन्‍टरप्रन्‍योरशिप इन एग्रीकल्‍चर) एक नॉन प्रोफिट संगठन है जो नव उद्यमियों को क्षमता संवर्द्धन, इन्‍क्‍यूबेशन सर्विसेज, बिजनेस सपोर्ट सर्विसेज एवं टैक्‍नोलॉजी पोर्टफोलियों मैनेजमेंट में सहायता प्रदान करता है। इस संस्‍थान का मुख्‍य उद्देश्‍य एग्री इन्‍टरप्रेन्‍योर को इन्‍क्‍यूबेशन एवं बिजनेस के स्‍थापना एवं विकास में सहयोग प्रदान करना है। 

 

 

Kisan Bhagidari, Prathamikta Hamari campaign under Azadi Ka Amrit Mahotsav
ICAR-NRCC, Bikaner organized an ‘Animal health cum awareness development camp for livestock farmers’ (पशुपालकों के लिए पशुस्वास्थ्य एवं जागरूकता विकास शिविर) at Anaj Mandi, Bikaner under Kisan Bhagidari, Prathamikta HamariCampaign as a part of Azadi Ka Amrit Mahotsav. 52 camel farmers/ camel cart owners along with their camel cart participated in this event. In animal health camp diseased camels were treated and prophylaxis /vaccination against trypnosomiasis was given to camels. A medicine kit containing dewormer, ectoparasitic drug, appetizer, and an antiseptic cream was also distributed to camel cart owners of Bikaner city and adjoining areas.
A scientist farmer interaction meet was organized on the occasion to get feedback about problems encountered during carting, management of camels used for carting, and educate the farmers about appropriate nutritional and clinical management for better health. Calendar activities for profitable camel farming, road safety measures for camel cart. Detailed information about ongoing government schemes and programmes for the benefit of camel farmers was shared with the participants.

 

 

 

 

 

केन्‍द्र द्वारा गाजर घास - जागरूकता सप्‍ताह (16-22 अगस्‍त, 2021) का आयोजन

 




भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र द्वारा भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर से प्राप्‍त पत्र पीएडब्‍ल्‍यु/2021 दिनांक 03.08.2021 एवं इस संबंध में डॉ.त्रिलोचन महापात्र, माननीय सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. की अपील की अनुपालना के तहत कार्यालयों में अति हानिकारक गाजर घास (चटक चांदनी/गंदी घास) के उन्‍मूलन एवं स्‍वच्‍छता अभियान हेतु दिनांक 16-22 अगस्‍त, 2021 के दौरान जागरूकता सप्‍ताह  मनाया गया। इस जागरूकता सप्‍ताह के तहत केन्‍द्र द्वारा विभिन्‍न गतिविधियां आयोजित की गई। कार्यालयों, गलियारों और परिसर के आस-पास के क्षेत्रों के साथ-साथ केन्‍द्र परिसर के बाहर आवासीय कॉलोनियों/गार्डन/सामुदायिक भवन इत्‍यादि स्‍थलों पर उगी हानिकारक खरपतवार गाजर घास से इस क्षेत्रों को मुक्‍त किया गया।
केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने गाजर घास उन्‍मूलन संबंधी केन्‍द्र की आयोजित गतिविधियों के दौरान इस खरपतवार से होने वाले दुष्‍प्रभावों के प्रति केन्‍द्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष रूप से जागरूक किया। डॉ. साहू ने  कहा कि हमारे देश में एक बहुत बड़े क्षेत्र में इस अप्रिय खरपतवार का निरंतर प्रसार हो रहा है जो कि एक चिंता एवं चिंतन का विषय है। चूंकि यह मानव एवं पशुओं दोनों के लिए अत्‍यंत नुकसानदायक है। अत: एक उष्‍ट्र (पशु)  प्रजाति आधारित संस्‍थान होने के कारण हमें इस विषाक्‍त घास के उन्‍मूलन एवं प्रबंधन हेतु प्रयास करने होंगे।
केन्‍द्र द्वारा इस सप्‍ताह के दौरान मेरा गांव मेरा गौरव परियोजना क्षेत्र के अंगीकृत गांवबीकानेर के उत्तर–पश्चिम स्थित चाक गरबी रूरल में गाजर घास के उन्‍मूलन हेतु एक कार्यक्रम आयोजित किया गया साथ ही ग्रामीणों को इस घास से होने वाले दुष्‍प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया ताकि इस खरपतवार घास के तीव्र प्रसार पर विराम लगाते हुए अन्‍य उपयोगी वनस्‍पतियों को बचाया जा सके।
इस जागरूकता सप्‍ताह के दौरान केन्‍द्र के डॉ. आर.के. सावल, प्रधान वैज्ञानिक,डॉ. शान्‍तनु रक्षित, वैज्ञानिक (कृषि विस्‍तार), श्री एम.के.राव, सहायक मुख्‍य तकनीकी अधिकारी द्वारा संबंधित कृषकों में गाजर घास से होने वाले दुष्‍प्रभावों संबंधी जानकारी का प्रचार-प्रसार किया गया।
केन्‍द्र द्वारा खरपतवार उन्‍मूलन हेतु चलाए गए सप्‍ताह को सफल बनाने में केन्‍द्र के सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अनुबंध कार्मिकों ने सक्रिय योगदान दिया।

 

_______________________________________________________________

 

स्‍वरोजगारी युवाओं से ऊँटनी के दूध की बिक्री हेतु आवेदन

 

NRCC 13/04/21 - भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर द्वारा ऊँटनी के औषधीय दूध का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किए जाने एवं आमजन के मध्‍य इसकी सुलभ उपलब्‍धता को ध्‍यान में रखते हुए स्‍वरोजगारी व्‍यक्तियों से निर्धारित प्रपत्र में आवेदन आमन्त्रित करते हुए इसे क्रियान्वित किया जाएगा।


इस संबंध में केन्‍द्र के निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने कहा कि ऊँटनी के दुग्‍ध व्‍यवसाय के प्रति स्‍वरोजगारी युवाओं (सेल्‍फ एम्‍प्‍लॉयड यूथ) को प्रोत्‍साहित करने एवं रूझान बढ़ाने हेतु  केन्‍द्र द्वारा यह नूतन पहल प्रारम्‍भ की जा रही है ताकि युवाओं को इस आजीविका से जोड़ा जा सके। डॉ. साहू ने ऊँटनी के दूध की बिक्री के संबंध में गत प्रयासों का हवाला देते हुए कहा कि एनआरसीसी द्वारा अपने सीमित संसाधनों के आधार पर बीकानेर शहर के वरिष्‍ठ नागरिक भ्रमण पथ पर पूर्व में भी दो बार बिक्री की पहल की गई तथा आमजन द्वारा ऊँटनी के दूध का उपभोग तथा इसकी स्‍वीकार्यता को लेकर सुखद परिणाम देखने को मिले। उपर्युक्‍त महत्‍वपूर्ण प्रयासों के फलस्‍वरूप आमजन में ऊँटनी के दूध के प्रति जागरूकता निश्चित रूप से बढ़ी है तथा दिन-ब-दिन इसकी मांग भी बढ़ रही है। अत: केन्‍द्र की यह मंशा है कि औषधीय गुणधर्मों युक्‍त इस दूध को स्‍वरोजगारी युवाओं के माध्‍यम से आमजन तक सुलभ व सतत रूप से पहुंचाया जा सके ताकि  इससे वे लाभान्वित हो सके।

 


डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक ने जानकारी दी कि केन्‍द्र द्वारा उत्‍पादित ऊँटनी के दूध की अपने स्‍तर पर विपणन करने एवं दूध की उपलब्‍धता के आधार पर अपनी सहमति हेतु इच्‍छुक स्‍वरोजगारी युवा (सेल्‍फ एम्‍प्‍लॉयड यूथ) केन्‍द्र से सम्‍पर्क कर निर्धारित प्रपत्र में अपना आवेदन जमा करवा सकते हैं ताकि इस संबंध में अपेक्षित कार्रवाई प्रारम्‍भ की जा सके। 

 

केन्‍द्र द्वारा तीन दिवसीय ई-ऑफिस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन


भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र,बीकानेर द्वारा वैज्ञानिकों,अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के प्रति सहजता एवं कुशलता प्रदान करने के उद्देश्‍य से ‘विभागीय स्‍तर पर ई-ऑफिस कार्यान्‍वयन’ विषयक तीन दिवसीय (08-10 फरवरी, 2021) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
दिनांक 08.02.2021 से प्रारम्‍भ हुए ई-ऑफिस संबंधी इस आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू द्वारा विधिवत् शुभारम्‍भ किया गया। डॉ.साहू ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली के बेहतर निष्‍पादन एवं इसे पारदर्शी बनाने हेतु ई-ऑफिस प्रणाली को शीघ्र एवं प्राथमिकता से अपनाया जाए। उन्‍होंने इस प्रणाली को अधिक सुगम बताते हुए प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण-सत्रों के दौरान सक्रियता एवं अधिकाधिक अभ्‍यास हेतु विशेष रूप से प्रोत्‍साहित किया। केन्‍द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन, नोडल अधिकारी (एच.आर.डी.) ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में विस्‍तृत रूप से सदन को जानकारी दी। 
प्रथम दिवस के प्रशिक्षण सत्र में केन्‍द्र के श्री दिनेश मुंजाल, सहायक मुख्‍य तकनीकी अधिकारी (कम्‍प्‍यूटर) ने ई-ऑफिस हेतु अपेक्षित सुविधाओं यथा- हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि के बारे में प्रतिभागियों को विस्‍तारपूर्वक बताया।  प्रशिक्षण के द्वितीय सत्र के दौरान केन्‍द्र के ई-ऑफिस एडमिनिस्‍ट्रेटर श्री हरपाल सिंह कौंडल, वैयक्तिक सहायक ने सैद्धान्तिक तौर पर ई-ऑफिस प्रणाली को समझाते हुए इसके विभिन्‍न पहलुओं पर बात की। साथ ही केन्‍द्र में ई-ऑफिस कार्य व्‍यवस्‍था के बारे में अवगत करवाया। दिनांक 09.02.2021 को प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर श्री मोहनीश पंचारिया, कनिष्‍ठ लिपिक ने ई-ऑफिस संबंधी व्‍यावहारिक आधार पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सम्‍बद्ध विभिन्‍न पहलुओं एवं इनकी निर्धारित प्रक्रियाओं के संबंध में जानकारी देते हुए इन्‍हें उदाहरण सहित समझाया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तृतीय दिवस पर आयोजित अभ्‍यास सत्र में प्रतिभागियों की विशेष रूचि देखी गई। इस दौरान प्रतिभागियों से प्रशिक्षण संबंधी प्रतिपुष्टि (फीडबैक) भी ली गई। इसके पश्‍चात् समापन सत्र का आयोजन किया गया।
दिनांक 10.02.2021 को कार्यक्रम समापन के अवसर पर मुख्‍य अतिथि के रूप में डॉ.एस.के.अग्रवाल, पूर्व निदेशक, केन्‍द्रीय बकरी अनुसंधान संस्‍थान, मथुरा ने केन्‍द्र के निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू एवं समस्‍त स्‍टाफ को प्रशिक्षण की सफलता पर बधाई संप्रेषित करते हुए कहा कि पूरे देश में ई-ऑफिस का प्रचलन बढ़ रहा है तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली द्वारा भी इस पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ऐसे में संबंधित प्रशिक्षण का महत्‍व एवं उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि हम तेजी से उच्‍च प्रौद्योगिकी (हाई-टैक) की तरफ बढ़ रहे हैं। विभागीय कार्यों के सुचारू प्रबंधन, पारदर्शिता तथा संस्‍थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों का लाभ, ऊँट पालकों तक पहुंचाने के दृष्टिकोण से भी यह प्रणाली महत्‍वपूर्ण रूप से सहायक सिद्ध होगी।
अध्‍यक्षीय उद्बोधन में केन्‍द्र के निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्‍साहित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रदत्‍त जानकारी एवं अनुभूत ज्ञान को सभी द्वारा अपने-2 कार्यक्षेत्र में क्रियान्वित किए जाने पर ही इस प्रशिक्षण की सार्थकता निहित है। अत: सकारात्‍मक सोच के साथ इस ओर आगे बढ़े एवं संस्‍थान के विकास में सभी समन्वित रूप से अपना महत्‍ती योगदान दें। अंत में मुख्‍य अतिथि डॉ.एस.के.अग्रवाल एवं केन्‍द्र निदेशक डॉ.ए.साहू के कर कमलों से प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। तत्‍पश्‍चात् धन्‍यवाद प्रस्‍ताव के साथ इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया।

 

 

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने मनाया गणतन्त्र दिवस

 

बीकानेर 26 जनवरी 2021 ।  भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द, बीकानेर में 72वां गणतन्त्र दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डा. आर्तबन्धु साहू ने झण्डारोहण कर सभी वैज्ञानिकों/अधिकारियों/कर्मचारियों को गणतन्त्र  के 72वें वर्ष में प्रवेश करने की बधाई व शुभ कामनाएं दीं।
डा. साहू ने कहा कि भारत की आजादी का दिन देखने के लिए हमारे पूर्वजों ने असंख्य बलिदान दिया है तथा इसी के फलस्वरूप हमें परतंत्रता से निजात मिली है। हमारे देश के संविधान में प्रत्येक नागरिक के कत्र्तव्य एवं अधिकार बताए गए हंै। अतः देश की प्रगति के लिए हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ-साथ अपने कत्र्तव्यों को सर्वाेपरि रूप में लेते हुए उनकी पालना किए जाने की महत्ती आवश्कता है।
डा.साहू ने अपने संबोधन में उष्ट्र प्रजाति व ऊँट पालकों का जिक्र करते हुए कहा कि इस संस्थान का कार्यक्षेत्र पूर्णतया इन्हीं से जुड़ा हुआ है अतः हमें भावी परिदश्य में ऊँट उत्पादन, ऊँटनी के दूध का प्रचलन, बालों की उपयोगिता, उष्ट्र पर्यटन-उष्ट्र दौड़ एवं इस व्यवसाय से सम्बद्ध विविध क्षेत्रों में उपयोगिता के साथ-साथ इनमें गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने हेतु सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। डाॅ.साहू ने उष्ट्र अनुसंधान के अनुछुए पहलुओं हेतु वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया तथा कहा कि हमें रेगिस्तान के जहाज ‘ऊँट‘ की औषधीय उपयोगिता को उभारते हुए इसे जन-जन तक प्रसारित करना होगा।
उन्होंने केन्द्र की अन्तर्राष्ट्रीय छवि में निरन्तरता बनाए रखने के लिए सभी को अपने-2 कार्यक्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ व सकारात्मक योगदान देने की बात कहीं।
इस अवसर पर नवाचार के तहत एनआरसीसी परिवार को अपनी गौरवपूर्ण 25 वर्ष सेवा देने वाले वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा सतर्कता सप्ताह के तहत आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को निदेशक महोदय के कर कमलों से सम्मानित किया गया।

केन्द्र में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का संचालन श्री हरपाल सिंह कौण्डल द्वारा किया गया एवं धन्यवाद प्रस्ताव श्री आर.ए.साहू द्वारा ज्ञापित किया गया।

 

एनआरसीसी द्वारा एससीएसपी तहत गांव हिमतासर में पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन


भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा भारत सरकार की अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत गांव हिमतासर में पशु स्‍वास्‍थ्‍य शिविर का आयोजन किया गया। दिनांक 5 दिसम्‍बर, 2020 को आयोजित इस पशु स्वास्थ्य शिविर में 807 विविध पशुओं जिनमें ऊँट 34, गाय 64,  भैंस 16, 414 बकरी एवं 279 भेड़ के साथ आए 64 महिला एवं पुरुष पशुपालक लाभान्वित हुए।

पशु स्वास्थ्य शिविर के दौरान आयोजित संवाद कार्यक्रम में केन्‍द्र के वैज्ञानिकों ने पशुओं के रखरखाव, पशु उत्‍पादन, उनके स्‍वास्‍थ्‍य एवं पशु व्‍यवसाय में आने वाले समस्‍याओं पर पशुपालकों के साथ गहन चर्चा भी कीं। केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर.के.सावल ने इस अवसर पर कहा कि बदलते परिवेश में पशुओं का रखरखाव भी उसी अनुरूप किया जाना चाहिए। इस हेतु पशुपालक भाई वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का प्रबंधन करें ताकि पशुओं के उत्‍पादन एवं पशुपालकों की आमदनी पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़े। डॉ.सावल ने भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही अनुसूचित जाति उपयोजना को महत्‍वपूर्ण बताते हुए इसका अधिकाधिक लाभ लिए जाने की बात कहीं।

एससीएसपी योजना के नोडल अधिकारी डॉ.काशीनाथ ने शिविर में लाए गए पशुओं की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति के बारे में जानकारी दीं। उन्‍होंने बताया कि पशुओं में ज्‍यादात्‍तर थनैला, फिरना (रिपीट ब्रिडिंग), चीचड़, खाज-खुजली, भूख कम लगना,  दस्त लगना, मिट्टी खाना आदि रोग पाए गए जिनके उपचार हेतु पशुओं को दवा दी गई। शिविर में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु पेट के कीड़े मारने की दवा एवं ऊँटों में सर्रा रोग से बचाव हेतु प्रोफालेक्टिक टीके लगाए गए साथ ही केन्द्र में निर्मित पशुओं के पौष्टिक आहार (संतुलित पशु आहार) व खनिज मिश्रण का वितरण किया गया।

इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.राकेश रंजन ने पशुओं में होने वाले विभिन्‍न रोगों से बचाव हेतु टीकाकरण का महत्‍व बताया एवं टीकाकरण की उचित समायवधि के बारे में पशपालकों को जानकारी दी।  केन्द्र द्वारा हिमतासर में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में श्री मनजीत सिंह ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।

 

 

 

एनआरसीसी ने ग्रामीण अंचल में मनाया महिला किसान दिवस : 15 अक्टूबर, 2020

 

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा दिनांक 15 अक्टूबर, 2020 को ग्रामीण अंचल में महिला किसान दिवस मनाया गया। बीकानेर जिले के गांव नापासर में आयोजित इस महिला दिवस कार्यक्रम के अवसर पर ‘पशुपालन में महिला कृषक की सहभागिता‘ विषयक एक परिचर्चा भी आयोजित की गई जिसमें गांव की लगभग 50 महिलाओं ने केन्द्र के वैज्ञानिक एवं अधिकारी गणों के साथ इस चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया। केन्द्र द्वारा इस अवसर पर कोविड-19 से बचाव हेतु सैनेटाईजिंग एवं मास्क वितरित किए गए। साथ ही महिला प्रतिभागियों को ऊँटनी के दूध से बनी खीर भी वितरित की गई।

केन्द्र निदेशक डॉ. आर.के.सावल ने महिला कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में इस प्रदेश के पशुधन का महत्वपूर्ण योगदान है तथा पशु व्यवसाय को पुष्ट बनाने में महिलाओं की विशेष  भूमिका देखी जा सकती है। डॉ. सावल ने महिलाओं को पशुओं के रखरखाव, दुग्ध उत्पादन, आहार-दाना, स्वास्थ्य, खाद आदि विभिन्न पहलुओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दीं। साथ ही उन्हें सामूहिक प्रशिक्षण हेतु प्रोत्साहित करते हुए पारंपरिक कृषि उत्पाद बनाने के अलावा आधुनिक तकनीकी जानकारी प्राप्त करने हेतु भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे कृषि दर्शन जैसे महत्वपूर्ण ज्ञानवर्धक कार्यक्रम को नियमित तौर पर देखने की अपील कीं ताकि महिला किसान इनमें प्रदत्त जानकारी से पशुओं का भलीभांति रखरखाव कर पशुओं से अधिक उत्पादन व आमदनी प्राप्त कर सके। 

इस अवसर पर केन्द्र के पशु चिकित्सक डॉ. काशीनाथ ने पशुओं में होने वाले विभिन्न रोगों यथा-गलाघोंटू, पशु के फिरने (रीपिट ब्रीडिंग), मुंहपका-खुरपका के साथ विशेष तौर पर थनैला रोग पर विस्तृत जानकारी दीं।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के तौर पर नापासर गांव की संरपच श्रीमती सरला देवी ने केन्द्र द्वारा महिला दिवस पर आयोजित गोष्ठी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए भावी समय में भी कृषि एवं पशुधन से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की केन्द्र से अपेक्षा जताईं। कार्यक्रम की विशिष्‍ट अतिथि उप सरपंच श्रीमती मंजू देवी ने आयोजन हेतु एनआरसीसी का आभार व्यक्त किया।

इसके अलावा महिला दिवस के इस कार्यक्रम में वार्ड पंच श्री विमल लद्दड़, पूर्व वार्ड पंच श्रीमती पुष्पा देवी एवं श्रीमती भगवती देवी एवं नापासर गांव के विभिन्न गणमान्य जनों से शिरकत कीं। कार्यक्रम का संचालन श्री हरपाल सिंह, वैयक्तिक सहायक ने किया तथा श्री नेमीचंद बारासा ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

 

 

उष्ट्र दुग्ध उद्यमिता विकास हेतु मार्केट चेन जरूरी: डॉ. सावल
एनआरसीसी ने मनाया स्थापना दिवस


 बीकानेर 6 जुलाई, 2020 । बदलते परिवेश में ऊँट पालन व्यवसाय प्रमुख तौर पर ऊँटनी के दूध एवं पर्यटन विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। अब ऊँटनी का दूध राजस्थान के जालौर, सिरोही, जैसलमेर, उदयपुर आदि जिलों के अलावा गुजरात, हैदराबाद आदि राज्यों में भी पनप रहा है। वहीं देशभर में आदविक फूड के अलावा 15 एन्टरप्रेन्योर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं जो ऊँटनी के दूध उद्यमिता की प्रबल संभावनाओं को दर्शाता है परंतु इस उद्यमिता को ठोस आधार देने हेतु मार्केट चेन विकसित करनी होगी ताकि ऊँट पालकों, किसान भाइयों की आमदनी में आशातीत वृद्धि की जा सके। ये विचार आज दिनांक को भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के 37वें स्थापना दिवस पर केन्द्र निदेशक डॉ. आर.के. सावल ने कही। उन्होंने केन्द्र की पर्यटन गतिविधियों संबंधी प्रगति को सदन के समक्ष रखते हुए कहा कि देश-विदेश से गत वर्ष केन्द्र में करीब 45000 पर्यटक भ्रमणार्थ आए साथ ही राजस्थान व गुजरात तथा समुद्र किनारे स्थित विभिन्न क्षेत्रों में उष्ट्र संबंधी पर्यटन गतिविधियाँ अत्यधिक पसंद की जाती है, इससे देखकर यह कहा जा सकता है कि ऊँट आज भी प्रासंगिक है।
   इस अवसर पर ‘उष्ट्र आधारित पर्यटन विकास के नए आयाम: उद्यमिता की प्रबल संभावनाएँ‘ विषयक आयोजित गोष्ठी में सहभागी श्री रमेश ताम्बिया, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, बीकानेर ने केन्द्र को 37वें स्थापना दिवस  की बधाई देते हुए कहा कि यह केन्द्र ऊँट पालकों एवं किसानों के लिए संवाद का अच्छा मंच उपलब्ध करवाता है। अतः नए आयामों में ऊँट पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने हेतु अधिक से अधिक चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने भारत सरकार की योजनाओं का लाभ लेने हेतु केन्द्र के माध्यम से किसान उत्पादन संगठन बनाए जाने हेतु प्रोत्साहित किया तथा ऊँटनी के दूध के विपणन को और बढ़ाने, इसके प्रति जागरूकता लाने तथा उष्ट्र पर्यटन क्षेत्रों में दूध को भी जोड़ने की बात कही।  
   गोष्ठी में ऊँटनी के दूध से जुड़े आदविक फूडस उद्यम के श्री हितेश राठी ने कहा कि आदविक फूड द्वारा ‘आदविक’ ब्रांड के नाम से ऊँटनी के दूध से चॉकलेट, दुग्ध पाउडर, साबुन, त्वचा देखभाल संबंधी उत्पाद तैयार कर विश्वभर में बिक्री की जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊँट पालक, किसान भाइयों के साथ-साथ आमजन इस दूध के औषधीय गुणों, इसकी उपयोगिता व महत्व को समझें। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह दूध उपभोक्ता को लाभ पहुंचाने के अलावा किसी प्रकार की एलर्जी नहीं करता है जो कि इस दूध की विशेषता कही जा सकती है। उन्होंने विपणन हेतु और अधिक अनुसंधान द्वारा बेहतर तालमेल की अपेक्षा जताते हुए ऊँटनी के दूध उद्यम हेतु केन्द्र द्वारा प्राप्त प्रेरणा व प्रोत्साहन हेतु सराहना भी की। 
गोष्ठी में प्रगतिशील ऊँट पालक श्री जेठाराम, लाखुसर, बीकानेर ने स्थापना दिवस पर केन्द्र की सराहना करते हुए कहा कि यह केन्द्र लघुतम किसान व पशुपालकों से भी जुड़ाव रखता है जिससे केन्द्र से प्राप्त ज्ञान, गांव की चैपाल कर सहज रूप से पहुंच रहा है। उन्होंने केन्द्र वैज्ञानिकों से यह अपेक्षा जताई कि संचार आदि माध्यमों से ऊँट पालकों एवं किसानों के परिवार को भी जोड़ा जाए। इस पर केन्द्र निदेशक डॉ. सावल ने उन्हें आश्वस्त किया कि यह केन्द्र पूर्व की तरह प्रसारित ‘ऊंटां री बातां‘ रेडियो कार्यक्रम को नवीन कलेवर के साथ पुनः शुरू करने जा रहा है। गोष्ठी में सहभागी बने श्री तेजू सिंह भाटी, गांव रायसर, बीकानेर ने उष्ट्र पर्यटन के तहत अपने अनुभव साझा करते हुए इसमें आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं को व्यक्त किया।
स्थापना दिवस के महत्वपूर्ण अवसर पर केन्द्र द्वारा प्रसार गतिविधियों के तहत ऊँट स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया जिसे केन्द्र के पशुचिकित्सक डॉ. काशीनाथ ने संचालित किया। वहीं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पौधरोपण भी किया गया। वहीं ‘शुष्क पारिस्थितिकी: वनस्पतियां व ऊँटों का पोषण‘ विषयक विस्तार पत्रक का भी विमोचन किया गया। कोविड-19 के संबंध में भारत सरकार तथा राज्य सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना को ध्यान में रखते हुए स्थापना दिवस के इस कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुमन्त व्यास ने दिया।

 

 

एनआरसीसी ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

भा.कृ.अनु.प-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर में दिनांक 8 मार्च, 2020 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया | इस अवसर पर देशी एवं विदेशी महिला सैलानियों को निःशुल्क प्रवेश एवं उष्ट्र सवारी की सुविधा प्रदान की गई इसके पश्चात चर्चा सत्र में उन्हें केंद्र की अनुसंधान गतिविधियों व उपलब्धियों, उष्ट्र पालन व्यवसाय तथा ऊँटनी के दूध के औषधीय गुण,  स्वच्छ दूध उत्पादन, दुग्ध अवधिकाल आदि के बारे में विस्तार से वैज्ञानिक जानकारी संप्रेषित की गई व ग्रामीण स्तर पर महिलाओं द्वारा बनाये गये उष्ट्र दूध आधारित व्यंजनों के बारे में जानकारी दी गई | इस विशेष दिवस पर पधारीं महिलाओं ने उष्ट्र सवारी का आनंद लिया साथ ही उन्हें केंद्र द्वारा ऊँटनी के दूध से निर्मित कुल्फी, आइसक्रीम आदि स्वादिष्ट उत्पादों का सेवन किया जिनकी उन्होंने सराहना की | इस अवसर पर उष्ट्र प्रजाति के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु महिला पर्यटकों को उष्ट्र से सम्बंधित प्रसार पत्र भी वितरित किए गए | विशेष चर्चा स्तर में महिलाओं की वैश्विक स्थिति, स्वास्थ्य इत्यादि पर चर्चा की गई व उपस्थित महिला पर्यटकों ने केंद्र द्वारा किये गए प्रयासों को सराहा | केंद्र की ओर से महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ.बसंती ज्योत्सना, वैज्ञानिक  के नेतृत्‍व में इस गतिविधि को संचालित किया गया तथा उन्‍हें उष्ट्र संग्रहालय, उष्ट्र बाड़ों, उष्ट्र डेयरी आदि का भ्रमण करवाया गया |
केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर.के.सावल के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में 30 महिलाओं की सक्रिय सहभागिता को देखते हुए उन्‍होंने प्रशंसा व्‍यक्‍त की त‍था कहा कि बदलते परिवेश में आज महिलाओं की लगभग सभी क्षेत्रों में सहभागिता देखी जा सकती है विशेषकर कृषि एवं पशुपालन में उनका बेहद योगदान रहता है, अत: महिला दिवस आदि  अवसरों पर उन्‍हें क्षेत्र से जुड़ा अद्यतन ज्ञान दिया जाना अपेक्षित है, क्‍योंकि जब उनके ज्ञान में अभिवृद्धि होगी तो निश्चित रूप से देश की सकल घरेलू उत्‍पाद दर में और अधिक वृद्धि लाई जा सकती है। डॉ.सावल ने महिला प्रकोष्‍ठ प्रभारी डॉ.ज्‍योत्‍सना व उनकी टीम द्वारा इस महत्‍वपूर्ण गतिविधि के सफल निष्‍पादन हेतु बधाई भी संप्रेषित की।

 

 

अनुसूचित जाति उपयोजना तहत केन्‍द्र-विशेषज्ञ पशुपालकों से हुए रू-ब-रू

जैसलमेर ग्रामीण इलाकों में पशु स्वास्थ्य शिविरों एवं किसान गोष्ठियों का आयोजन : 2-3 मार्च, 2020

 

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत जैसलमेर जिले के गांव दबड़ी एवं  सम में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस उपयोजना के तहत केन्‍द्र के वैज्ञानिकों, पशु चिकित्‍सकों, तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारियों के दल द्वारा 2 मार्च, 2020 को गांव दबड़ी में आयोजित इस पशु स्वास्थ्य शिविर में 109 पशुपालक अपने पशुओं जिनमें ऊँट ( 48), गाय (264), भेड़ व बकरी (1827)  के साथ सम्मिलित हुए। शिविर में लाए गए बीमार पशुओं का इलाज व उचित निदान किया गया। इसी दल द्वारा 3 मार्च को जैसलमेर जिले के सम में भी पशु शिविर व किसान गोष्‍ठी आयोजित की गई। इस दौरान इलाके के 69 पशुपालकों ने विभिन्‍न रोगों से ग्रसित पशुओं यथा- ऊँट (205), गाय (215), भेड़ व बकरी (980) के शिरकत की तथा इलाज, निदान व चिकित्‍सीय परामर्श  प्राप्‍त कर इन गतिविधियों का लाभ लिया।
 उपर्युक्‍त अवसरों पर पशुपालकों से बातचीत करते हुए केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर.के.सावल ने ग्रामीणों को भारत सरकार की इस योजना की जानकारी दी तथा प्रोत्‍साहित किया कि ऐसे अवसरों का भरपूर लाभ लिया जाना चाहिए क्‍योंकि पशु विशेषज्ञ आपके द्वार आते हैं। उन्‍होंने पशुओं से बेहतर उत्‍पादन लेने हेतु वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का रखरखाव, बीमारियों के इलाज के साथ -साथ उनके स्वास्थ्य हेतु उचित समाधान भी सुझाए।
 केन्‍द्र के डॉ .काशीनाथ, नोडल अधिकारी (एससीएसपी योजना) ने जानकारी दी कि पशुओं में मुख्‍यत:  चीचड़, पेट के कीड़े, खाज -खुजली, भूख कम लगना, दस्त लगना, मिट्टी खाना आदि के उपचार हेतु दवाइयां दी गई। कमजोर पशुओं को मल्टी विटामिनयुक्त इंजेक्शन तथा उनमें पौषकता वृद्धि हेतु केन्द्र निर्मित संतुलित पशु आहार व खनिज मिश्रण दिया गया।
 इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ .राकेश रंजन ने रोगग्रस्‍त व कमजोर पशुओं के स्वास्थ्य सुधार  हेतु समय पर इलाज व चिकित्‍सीय परामर्श को प्राथमिकता देने के प्रति पशुपालकों को जागरूक किया। डॉ.बी.एल.चिरानियां, पशु चिकित्‍सा अधिकारी ने पशुओं को स्‍वस्‍थ रखने हेतु पुरानी-गिली मिट्टी बदलने, गर्मी सर्दी  मौसम  अनुसार उचित  बचाव करने तथा बीमार पशुओं को स्‍वस्‍थ पशुओं  से  अलग  रखने की सलाह दी।
 आयोजित गतिविधियों के दौरान केन्‍द्र दल में सम्मिलित अन्‍य अधिकारियों श्री मनजीत सिंह, श्री अशोक यादव, श्री अनिल कुमार ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया। 

 

 

 

एनआरसीसी ने उद्यम समागम-2020 में सहभागिता निभाई

भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर ने (28-29 फरवरी,2020) उद्यम समागम-2020 में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। एम.एस.एम.ई.-डी.आई उद्योग विभाग, जयपुर एवं जिला प्रशासन एवं जिला उद्योग केन्‍द्र,बीकानेर के संयुक्‍त तत्‍वावधान में  बीकानेर जिले में स्थित ग्रामीण हाट में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उद्यम समागम के तहत सिरेमिक, वूलन व खाद्य प्रसंस्‍करण उद्यम के विकास हेतु दो दिवसीय प्रदर्शनी व कार्यशाला कार्यक्रम में केन्‍द्र ने उष्‍ट्र प्रजाति के विकास एवं संरक्षण हेतु अपनी अनुसंधान उपलब्धियों एवं बहुआयामी गतिविधियों को आमजन के समक्ष रखा। साथ ही ऊँटनी के दूध पर हुए अनुसंधान एवं इसकी औषधीय उपयोगिता संबंधी गतिविधियों को प्रदर्शित कर दूध एवं दूध उत्‍पादों के महत्‍व को प्रतिपादित करने के उद्देश्‍य से वैज्ञानिक जानकारी भी संप्रेषित की।
उद्यम समागम कार्यक्रम के अतिथियों डॉ.बी.डी.कल्‍ला,ऊर्जा एवं जन स्‍वास्‍थ्य अभियांत्रिकी मंत्री, वीरेन्‍द्र बेनीवाल, पूर्व मंत्री श्री कुमार पाल गौतम, जिला कलक्‍टर ने इस दौरान एनआरसीसी की स्‍टॉल का भी अवलोकन किया। उद्यम समागम में केन्‍द्र की वैज्ञानिक गतिविधियों को सराहा गया। केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर.के.सावल ने कहा कि उद्यम समागम जैसे आयोजित कार्यक्रमों के माध्‍यम से नूतन प्रौद्योगिकी व इनसे संबद्ध उद्यमों को व्‍यावहारिक तौर पर अपनाए जाने हेतु आमजन के समक्ष रखने में आसानी होती है। इसी उददेश्‍य से एनआरसीसी भी ऊँटनी के दूध को व्‍यवसाय के रूप में परिणत करने हेतु तत्‍पर रहता है। अत: रोजगारोन्‍मुखी ऐसे अवसरों का लाभ लिया जाना चाहिए। डॉ.बसंती ज्‍योत्‍सना, वैज्ञानिक एवं समन्‍वयक एवं केन्‍द्र के अन्‍य स्‍टाफ ने  इस महत्‍वपूर्ण गतिविधि में सक्रिय योगदान दिया।